दो शादी का आरोप, निलंबन की कार्रवाई और प्रतिशोध की आशंका! छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में क्यों मचा बवाल?
छत्तीसगढ़ में डॉ. धर्मेंद्र गहवई के निलंबन पर CIDA ने सवाल उठाए। पुरानी शिकायत, हाईकोर्ट की लड़ाई और प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी से जुड़ा पूरा मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में उप संचालक डॉ. धर्मेंद्र कुमार गहवई के निलंबन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के आरोप से जुड़ी करीब दो साल पुरानी शिकायत पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) ने निलंबन पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसोसिएशन को आशंका है कि चिकित्सकीय कैडर के प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के खिलाफ हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे डॉक्टर पर कार्रवाई दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, प्रतिशोध का यह आरोप अभी साबित नहीं हुआ है।
डॉ. गहवई के खिलाफ कार्रवाई को उनकी दो शादियों से जुड़ी शिकायत से जोड़कर देखा जा रहा है। निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। ये नियम शासकीय सेवकों के आचरण से जुड़े हैं।
लेकिन इस मामले में अहम सवाल यह है कि शिकायत करीब दो साल पुरानी होने के बावजूद कार्रवाई अब क्यों की गई? क्या इस अवधि में विभागीय जांच हुई थी? क्या आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए या कोई नया तथ्य सामने आया?
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते। केवल आरोप या नियमों का उल्लेख अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। निलंबन के आधार और विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कार्रवाई की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई से जुड़ा है विवाद
CIDA के अनुसार, डॉ. गहवई उन चिकित्सकों में शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय (DHS) के चिकित्सकीय कैडर के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्तियों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे समय में याचिकाकर्ता डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होने से कई सवाल खड़े होते हैं। उसे आशंका है कि इस घटनाक्रम का असर चिकित्सकीय कैडर के अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे चिकित्सकों पर पड़ सकता है।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने का कोई निर्णायक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में निलंबन को न्यायिक लड़ाई से जोड़कर देखने से पहले विभाग का पक्ष और कार्रवाई के दस्तावेज सामने आना जरूरी है।
चिकित्सकीय पदों पर नियुक्तियों को लेकर पहले से खींचतान
स्वास्थ्य विभाग में विवाद केवल डॉ. गहवई के निलंबन तक सीमित नहीं है। चिकित्सकीय कैडर के डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से असहमति की स्थिति बताई जा रही है।
CIDA का तर्क है कि एडिशनल डायरेक्टर सहित चिकित्सकीय कैडर से जुड़े पदों पर नियुक्तियों में संवर्गीय पात्रता, वरिष्ठता और भर्ती नियमों का पालन किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने RMA, जॉइंट डायरेक्टर और DHS से जुड़े विवादित पदस्थापनों को लेकर अतिरिक्त कानूनी कदम उठाने की तैयारी भी जताई है।
इस विवाद ने स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था, चिकित्सकीय विशेषज्ञता और पदस्थापना नियमों को लेकर बहस तेज कर दी है।
CIDA की चेतावनी—जरूरत पड़ी तो प्रदेशव्यापी आंदोलन
डॉ. गहवई के निलंबन के खिलाफ CIDA ने कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने कार्रवाई के आधारों की निष्पक्ष समीक्षा करने और यदि प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो निलंबन रद्द करने की मांग की है।
CIDA ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई दुर्भावना से प्रेरित पाई गई, तो वह कानूनी लड़ाई के साथ प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन भी करेगा। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि कानूनी याचिकाएं दायर करने वाले चिकित्सकों पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के सामने दो बड़े सवाल
डॉ. गहवई के निलंबन के बाद अब विभाग को दो अहम सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। पहला, पुरानी शिकायत पर कार्रवाई का आधार क्या है और जांच की प्रक्रिया में कितना समय लगा? दूसरा, क्या इस कार्रवाई का चिकित्सकीय कैडर की नियुक्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई से कोई संबंध है?
फिलहाल, CIDA ने निलंबन पर सवाल उठाए हैं, लेकिन प्रतिशोध का आरोप साबित नहीं हुआ है। विभाग का विस्तृत पक्ष, निलंबन आदेश में दर्ज कारण और जांच से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
